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इतिहास के पन्नों में सिमटता हाट गांव

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1059 ई. में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा बंगाल के गौण ब्राहमणों (हटवाल) की बसवाट से बसा हाट गांव अब देश और राज्य में बिजली की जरुरत को पूरा करने के लिये इतिहास के पन्नों में सिमट जायेगा।  हाट गांव के इतिहास में सिमटने की ये कहानी अलकनंदा नदी पर वर्ष 2003 से निर्माणाधीन 444 मेगावाट विष्णुप्रयाग-पीलकोटी जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य शुरु होने के साथ शुरु हुई। 4 हजार करोड़ की इस योजना के लिये हेलंग से पीपलकोटी तक 13.4 किलोमीटर की टनल का निर्माण कर अलकनंदा नदी के पानी को टनल से गुजार कर हाट गांव में 111 मेगावट की 4 टर्बाइनों के जरिये 444 मेगावाट बिजली का उत्पान करने की योजना तैयार हुई। परियोजना के निर्माण के लिये शासन, प्रशासन और परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी टीएचडीसी इंडिया लि. की ओर से कई दौर की वार्ता की गई और गांव की जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया। जिसके बाद 2021 के सितम्बर माह तक 140 परिवारों में से 112 परिवार अन्यत्र बसा दिया गया।  लेकिन कुछ परिवारों ने कुछ विस्थापन के लिये सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, सामुदायिक विकास के जैसी शर्तों को पूरा करने त...