जब छोड़छाड़ बाबुल का घर वो मेरे घर आंगन आई। उसके आने के संग ही घर आंगन में खुशहाली आई। उसने स्वीकार किया संग चलना तो, तो जीवन में इंद्र धनुष की रंगत आई। मेरी कमियों और खूबी को ...
आजाद परिंदा सा था मैं तो, कैद किया तुमने मुझको। यारों की यारी छूट गई, छूट गया वो अल्हड़पन, जब से जीवन में आकर, कैद किया तुमने मुझको। अच्छी लगती, ये कैद तुम्हारी अब मुझको। जब थक...