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दिसंबर 17, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कब तक ठगे जाते रहोगे?

रंग रँगिलू कुर्ता पटपटु पजामा, छोरियों का खुल्यां हिलोरा हाय रे जमाना।। अध बौंल्या बिलोज ब्वारियों का,नखरा हजार काम धांणियों बे बोग मारी घुमदी बाज़ार ---- लापरवाह