संदेश

मार्च 16, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विकासवाद के नये पैक मैं, परिवर्तन का है युग आया।

विकासवाद के नये पैक मैं, परिवर्तन का है युग आया।  पेड़ों कि झुरमुट सिमटी और कंक्रीट का जंगल उग आया।  क्रांति हुई और अपनों से नाता टूट गया और हाथों में मोबाईल आया।  विकासवाद के नये पैक मैं, परिवर्तन का है युग आया।  धर्म ध्वजा के पोषक के कन्धों पर सवार हो कामदेव आया।  और संत, फकीरों कि कुटिया से, काम शास्त्र का फतुआ आया।  विकासवाद के नये पैक मैं, परिवर्तन का है युग आया। 

अब नदी खामोश हैं।

भ्रष्ट तंत्र की खामियों का अब पुलिंदा खुल गया, गुलज़ार गांव शहरों मैं अब बियावा रह गया। सरहदें अपनी बता कर अब नदी खामोश हैं।  कंक्रीट के जंगलों मैं अब मलबे का अम्बार रह गया।

फिरकापरस्ती

नादाँ हैं वो लोग जो कहते हैं की मैं फिरकापरस्ती पे नहीं लिखता, लिखता हूँ मैं फिरकापरस्ती पर, बस मजहबों की फिरकापरस्ती पे नहीं लिखता.

....... तो मौत कि सड़कों से गुजरगी इस बार बद्री-केदार कि यात्रा

दो  दिन पहले बदरीनाथ यात्रा मार्ग देखने का मौका मिला, तो आश्चर्य हुआ कि हमारी सरकार बद्रीनाथ कि यात्रा इस रास्ते से शुरू करने कि तैयारी कर रही जिस सड़क को आठ माह मैं सीमा सड़क संगठन नहीं बना पाया।  उसे लोक निर्माण विभाग डेढ़ माह मैं बना देगा ये कह रहे थे।  प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार। हंसी आ रही थी ये सोच कर कि पिछली दिक्क़त खत्म हुए। अभी साल भी नहीं हुआ और हमारी सरकार और नोकरशाह उसे भूल कर नयी दिक्क़त को न्योता दे रहे है।  इस पर भी सब लोगो के अपने अपने विचार हैं।  जंहा व्यापारी इसे सरकार कि अच्छी पहल बता रहे हैं।  वंही जो लोग आपदा को झेल चुके हैं।  उनका मानना है कि  इस हालात मैं यात्रा शुरू कि जाती है तो पिछली परेशानी कि पुनरावृत्ति हो सकती है। लेकिन जून मैं लोकसभा चुनाव है और पुरे देश मैं  कांग्रेस के खिलाफ एंटी कम्बेन्सी फेक्टर हावी है और उस पर प्रदेश के नए मुखिया ने तीन सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों को जीताने का दावा भी कर डाला है। ऐसे मैं मुखिया को अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ तो करना है। सो यात्रा ही शुरू करना ठीक होगा क्यूंकि रा...
पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार करता फिर से नयी घोषणा और देता उपहार देख चुनावी द्वन्द खड़ा तो बदल गया व्यवहार पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार  चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार उड़न खटोले, मोटर छुटी और छोड़ दिया घरबार आज नमन करते हैं सबको और करते सत्कार पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार हाथ जोड़कर कहता जीने की आज़ादी दूंगा और दूंगा आहार रोजगार के नए मापदंड और दूंगा व्यापार पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार यही वक्त है यही है मोका तू करले गहन विचार नयी सोच और नए मनन से दे नव भारत को आधार