कब तक ठगे जाते रहोगे?

रंग रँगिलू कुर्ता पटपटु पजामा,
छोरियों का खुल्यां हिलोरा
हाय रे जमाना।।
अध बौंल्या बिलोज ब्वारियों का,नखरा हजार
काम धांणियों बे बोग मारी घुमदी बाज़ार

---- लापरवाह

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