दुनिया माँ

यीं बीरांणी दुनिया माँ,
आपणा छों खुजयांण लगयूं।
आपणा अफु से दूर करी,
बीरांणों तैं लौंफ्याँण लगयूं।।

ब्वे बुबा तैं अब तिरये की,
ब्वारी छौं मनाण लगयूं।
स्वर्ग कु बाटु छोड़ी,
अब नर्क छौं मूल्यांण लगयूं।।

जु ब्याळी तलक मेरा बाना,
अपड़ी जिकुड़ी छौं झुरांण लगयूं।
वेकि भलि छुयूँ माँ अब,
गलति छौं गिंणाण लगयूं।।

छोड़छाड़ि अपड़ी धरती,
लाड उनि खुजयांण लगयूं।
गौं की पुन्गडी बांजी करी,
कोदु दुकान्यों माँ खुज्याणं लगयूं।।

यीं बीरांणी दुनिया माँ,
आपणा छों खुजयांण लगयूं।
आपणा अफु से दूर करी,
बीरांणों तैं लौंफ्याँण लगयूं।।

द्वी फलांग कम कना कु,
बंणु ते कटाण लगयूं।
द्वी घड़ी का सुखों का बाना,
सुख सदनि कु लुटाण लगयूं।।

उज्याली नदी सभ्यता अपणी,
सुरँगु माँ लिजांण लगयूं।
भोळ अपडु गिरबी धरि,
भल्यारा का स्विनणा छौं गठ्यांण लगयूं।।

थाती छोड़ी अपड़ी दीदा,
बिरांणी छों लोफ्याँण लगयूं।
देबि दयबता छोड़ी,
अब गॉड छों भटयाँण लगयूं।।

यीं बीरांणी दुनिया माँ,
आपणा छों खुजयांण लगयूं।
आपणा अफु से दूर करी,
बीरांणों तैं लौंफ्याँण लगयूं।।

......लावरवाह

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