संदेश

जवाब मांगों इन देश के कर्णधारों से

................. आपदा की त्रासदी, जल प्रलय और पानी की विनाशलीला ये शब्द पिछले बारह दिनों से आम तोर पर सुनने और पढने को मिल रहे हैं। इन शब्दों को पढ़ और सुन कर हर आम आदमी अवाक् है। जिन्होंने वो सब खुद देखा वो कुछ कहने की स्थिति मैं नहीं हैं। जिन्होंने अपनों को खोया वो अपनों की याद मैं पगलाए हुए हैं। ये प्रकृति की आम प्रक्रिया है। हर आदमी मैं संवेदना होती है, तो ये भाव भी होते हैं। लेकिन इन सब के बिच एक बड़ी चीज़ देखने को मिली बुधवार को NDTV की एक बहस मैं राहुल की अंधभक्ति का उदाहरण देखा कांग्रेस के बुजुर्ग और राज्य सभा के सांसद माननीय सत्यव्रत चतुर्वेदि जी (माननीय की आवश्यकता इसलिए है की कंही नेता फिर न कहने लगें की संसद की अवमानना हुई।) राहुल बाबा के आपदा पर्यटन की पहले तो सफाई देते रही जब उन्हें लगा की अब सफाई से काम नहीं चलने वाला तो वे चेनल पर झुंज्लाने लगे और उठ खड़े हुए। जबकि एक सवाल के जवाब मैं उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। दूसरा चेनल देखने लगा तो आन्ध्र के दो बड़े नेताओं को आपस मैं लड़ते देखा, वो भी जनता को घर पंहुचाने के लिए। थोडा अचंभित था, फिर याद आया की कुछ टाइम बाद चुनाव...

लापरवाह क्यूँ?

लापरवाह क्यूँ? ??????????? ........अजीब सा लगता है सबको, जब कोई भी """"स्टेटस""""' पर ये देखते हैं। कई नजदीकी लोग पूछ भी लेते हैं, मैं मुस्करा देता हूँ बस टाल जाता हूँ### जबकि बात सिर्फ इतनी नहीं बात कई बरस के कड़वे और बुरे अनुभवों की है। जीवन के कई पड़ावों पर ज़िम्मेदार और परवाह करने का दावा करने वाले लोगों को देखा, मगर ये सब सिर्फ बातों तक दिखा। तो काफी सोचने के बाद खुद को "'""""लापरवाह"'"''" कहने से सुकून मिलता है कि कम से कम कोई मेरे दावे को हवाई दावा नहीं कहेगा,,,,,,,,,,, झूठा नहीं कहेगा!!!!!!!!! ...........अच्छा भी लगता है जब कि बार साथी और सीनियर लापरवाह को पसंद करते हैं। या लापरवाही से कही लिखी बातों को पसंद करते हैं।।  लापरवाह