जवाब मांगों इन देश के कर्णधारों से
................. आपदा की त्रासदी, जल प्रलय और पानी की विनाशलीला ये शब्द पिछले बारह दिनों से आम तोर पर सुनने और पढने को मिल रहे हैं। इन शब्दों को पढ़ और सुन कर हर आम आदमी अवाक् है। जिन्होंने वो सब खुद देखा वो कुछ कहने की स्थिति मैं नहीं हैं। जिन्होंने अपनों को खोया वो अपनों की याद मैं पगलाए हुए हैं। ये प्रकृति की आम प्रक्रिया है। हर आदमी मैं संवेदना होती है, तो ये भाव भी होते हैं।
लेकिन इन सब के बिच एक बड़ी चीज़ देखने को मिली बुधवार को NDTV की एक बहस मैं राहुल की अंधभक्ति का उदाहरण देखा कांग्रेस के बुजुर्ग और राज्य सभा के सांसद माननीय सत्यव्रत चतुर्वेदि जी (माननीय की आवश्यकता इसलिए है की कंही नेता फिर न कहने लगें की संसद की अवमानना हुई।) राहुल बाबा के आपदा पर्यटन की पहले तो सफाई देते रही जब उन्हें लगा की अब सफाई से काम नहीं चलने वाला तो वे चेनल पर झुंज्लाने लगे और उठ खड़े हुए। जबकि एक सवाल के जवाब मैं उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। दूसरा चेनल देखने लगा तो आन्ध्र के दो बड़े नेताओं को आपस मैं लड़ते देखा, वो भी जनता को घर पंहुचाने के लिए। थोडा अचंभित था, फिर याद आया की कुछ टाइम बाद चुनाव हैं। जिस कारन ये सब हो रहा है। वंही गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के तथाकथित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15000 गुजरातियों को लेजाने का दंभ भर रहे थे और उसे भी बढ़ के गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज जो धर्म का ज्ञान भी बांटे हैं। उन्होंने तो इन सब को पीछे छोड़ते हुए तबाही मैं जान खो चुके लोगों का पिंड दान ग्यारवें दिन ही कर दिया और ये बात खुद लोगों को भी बताई। ये क्या हो रहा है समझ नहीं आ रहा। सोनिया जी रसद के वाहनों को झंडी दिखा कर भेजती हैं और वो रास्ते मैं खड़े हो रहे हैं।
क्या ये अपनी-अपनी राजनीती चमकने की कोशिश नहीं है। अगर आपको भी ये लगता है तो शेयर करो। और जवाब मांगों इन देश के कर्णधारों से की क्या है ये?
लेकिन इन सब के बिच एक बड़ी चीज़ देखने को मिली बुधवार को NDTV की एक बहस मैं राहुल की अंधभक्ति का उदाहरण देखा कांग्रेस के बुजुर्ग और राज्य सभा के सांसद माननीय सत्यव्रत चतुर्वेदि जी (माननीय की आवश्यकता इसलिए है की कंही नेता फिर न कहने लगें की संसद की अवमानना हुई।) राहुल बाबा के आपदा पर्यटन की पहले तो सफाई देते रही जब उन्हें लगा की अब सफाई से काम नहीं चलने वाला तो वे चेनल पर झुंज्लाने लगे और उठ खड़े हुए। जबकि एक सवाल के जवाब मैं उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। दूसरा चेनल देखने लगा तो आन्ध्र के दो बड़े नेताओं को आपस मैं लड़ते देखा, वो भी जनता को घर पंहुचाने के लिए। थोडा अचंभित था, फिर याद आया की कुछ टाइम बाद चुनाव हैं। जिस कारन ये सब हो रहा है। वंही गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के तथाकथित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15000 गुजरातियों को लेजाने का दंभ भर रहे थे और उसे भी बढ़ के गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज जो धर्म का ज्ञान भी बांटे हैं। उन्होंने तो इन सब को पीछे छोड़ते हुए तबाही मैं जान खो चुके लोगों का पिंड दान ग्यारवें दिन ही कर दिया और ये बात खुद लोगों को भी बताई। ये क्या हो रहा है समझ नहीं आ रहा। सोनिया जी रसद के वाहनों को झंडी दिखा कर भेजती हैं और वो रास्ते मैं खड़े हो रहे हैं।
क्या ये अपनी-अपनी राजनीती चमकने की कोशिश नहीं है। अगर आपको भी ये लगता है तो शेयर करो। और जवाब मांगों इन देश के कर्णधारों से की क्या है ये?
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