....... तो मौत कि सड़कों से गुजरगी इस बार बद्री-केदार कि यात्रा
दो दिन पहले बदरीनाथ यात्रा मार्ग देखने का मौका मिला, तो आश्चर्य हुआ कि हमारी सरकार बद्रीनाथ कि यात्रा इस रास्ते से शुरू करने कि तैयारी कर रही जिस सड़क को आठ माह मैं सीमा सड़क संगठन नहीं बना पाया। उसे लोक निर्माण विभाग डेढ़ माह मैं बना देगा ये कह रहे थे। प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार।
हंसी आ रही थी ये सोच कर कि पिछली दिक्क़त खत्म हुए। अभी साल भी नहीं हुआ और हमारी सरकार और नोकरशाह उसे भूल कर नयी दिक्क़त को न्योता दे रहे है। इस पर भी सब लोगो के अपने अपने विचार हैं। जंहा व्यापारी इसे सरकार कि अच्छी पहल बता रहे हैं। वंही जो लोग आपदा को झेल चुके हैं। उनका मानना है कि इस हालात मैं यात्रा शुरू कि जाती है तो पिछली परेशानी कि पुनरावृत्ति हो सकती है। लेकिन जून मैं लोकसभा चुनाव है और पुरे देश मैं कांग्रेस के खिलाफ एंटी कम्बेन्सी फेक्टर हावी है और उस पर प्रदेश के नए मुखिया ने तीन सीटों पर पार्टी के प्रत्याशियों को जीताने का दावा भी कर डाला है। ऐसे मैं मुखिया को अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ तो करना है। सो यात्रा ही शुरू करना ठीक होगा क्यूंकि राजगद्दी से उतरे मुखिया ने भी बार बार ये कहते रहे कि सरकार ने दुनियां का सबसे बड़ा रेस्क्यू किया है। लेकिन वो भूल गये कि वो रेस्क्यू सेना और आटीबीपी के बिना नहीं हो सकता था। ये बड़ी अजीब स्थिति है देश के इस राज्य कि। और इससे बड़ी बात ये कि जब ये बात मेने लिखी तो मेरे साथियों ने मुझे कहा कि मैं गलत कर रहा हूँ। इससे यंहा के व्यवसाय पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। तो मेरी समझ मैं आया कि मैं गलत हूँ कि मैं सही कहता हूँ। तो साफ़ है कि यंहा लोग और सरकार मौत कि इन सड़कों से इस बार बद्री-केदार कि यात्रा करवा के ही दम लेंगे।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें