खुदा से लड़ते होंगे.........
जज्बात वँहा भी मचले होंगे,
अरमान वँहा भी तड़पे होंगे।
मेरे दीदार की ख्वाइश में,
हम दम वो भी तो जलते होंगे।।
कहते तो न होंगे लबों से कुछ,
पर दिल ही दिल में रोते होंगे।।
महफ़िल में छलक न जाएं अश्क़ कंही,
ये सोच सोच महफ़िल में हंसते होंगे।।
अरमान-ए-मुहब्बत तो होगी।
पर कहने से डरते होंगे।।
आंख चुरा कर वो सबसे,
मुझको चुपकेे से तकते होंगें।।
देख के मुझको खाबों में,
चेहरा आँचल से ढकते होंगे।।
क्यों इश्क हुआ उनको मुझसे।
ये सोच खुदा से लड़ते होंगे।।
लापरवाह
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