पलायन कु चिंतन

पलायन कु चिन्तन हुंणु च देरादून मां,
भैजी बिचारु नीति बस्यूं, बौजी देरादून मां।।
दादी बिचारि घौर पौणी, मम्मी देरादून मां,
पलायन कु चिन्तन हुंणु च देरादून मां।।

पलायन कु चिन्तन हुंणु च देरादून मां,
भैजी बिचारु नीति बस्यूं, बौजी देरादून मां।।

पुंगड़ी घौर बांजा पड़ीं, बिबलाट देरादून मां,
बानिबनि का बाना करि, घरबार देरादून मां।।
गौं की तिबारी सूनी करी, सब्बि देरादून मां,
अपडी त पछ्यांण हरची, तख ते देरादून मां।।

पलायन कु चिन्तन हुंणु च देरादून मां,
भैजी बिचारु नीति बस्यूं, बौजी देरादून मां।।

पलायन कु चिन्तन हुंणु च देरादून मां,
घओरे तिबारी सुनी करी,रमंणांट देरादून मां।।
अब त सेवा सोंली छुटी, तख ते देरादून मां,
संस्कारुं बि मुख लुकाई, तख ते देरादून मां।

पलायन कु चिन्तन हुंणु च देरादून मां,
भैजी बिचारु नीति बस्यूं, बौजी देरादून मां।।

चमोली, टीरि, पौड़ी छोड़ी, सब्बि देरादून मां।।
रगड़ बगड़ कम कनो प्रयास देरादून मां,
पहाड़ों की पिड़ा कु इलाज खोजणा देरादून मां।।
पलायन की भारि लड़ै लगीं च तख तै देरादून मां।।

----लापरवाह

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