म्याळी बांद...

मेरी वा म्याळी बांद, छुयों की सजोळी सी।
जेठ का ध्ड़यांना घाम, छमटों कु पांणी सी।।

रतन्याळी आँखि वींकि, ज्वोन कि उजयाली सी।
लम्बी तड़तड़ी च गाती, खैर की गंजयाळी सी।।

ह्यूंद का  दिनों  मां  घाम  की निवाती सी।
औंसी की रात मां दिवों की उज्याळी सी।।

ज्वानों तैं च मायाजाळ, दानों की दवेई सी।
धांण की  पड्याळ मां च्या की तुराक सी।।

रतबयाँणी उजयाली जनी, कतिगा का मौ सी।
माना या न तुम वा छै बीन्सरी का स्विंडां सी।।

तड़तड़ी उकाळी का बटा, बिसोंणें कि धार सी।
मुलमुला हैंसदी मुखड़ी वींकि, बुरांशे टकोरी सी।।

माया कु जिबाळ छै वा डंडों की आंछरी सी।
मेरी वा म्याळी बांद, छुयों की सजोळी सी।।

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