छूटते हाथ

उसके कदमों से ताल न मिला सका मैं।
उसके अंदाज में शायद न जी सका मैं।।

तो छूट रहा है हाथ अब मेरा उसके हाथ से।
और जिंदगी से उसकी ओझल हो रहा हूँ मैं।।

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