पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार
चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार
करता फिर से नयी घोषणा और देता उपहार
देख चुनावी द्वन्द खड़ा तो बदल गया व्यवहार
पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार 
चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार
उड़न खटोले, मोटर छुटी और छोड़ दिया घरबार
आज नमन करते हैं सबको और करते सत्कार
पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार
चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार
हाथ जोड़कर कहता जीने की आज़ादी दूंगा और दूंगा आहार
रोजगार के नए मापदंड और दूंगा व्यापार
पांच साल मैं फिर से लौटा लोकतान्त्रिक त्यौहार
चेहरे पर मायूसी लेकर नेता आया आज हमारे द्वार
यही वक्त है यही है मोका तू करले गहन विचार
नयी सोच और नए मनन से दे नव भारत को आधार



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आठ दशक से गोपेश्वर में रही है, रामलीला अभिमंचन की परंपरा

खुदा से लड़ते होंगे.........

छूटते हाथ