अब नदी खामोश हैं।


भ्रष्ट तंत्र की खामियों का अब पुलिंदा खुल गया,
गुलज़ार गांव शहरों मैं अब बियावा रह गया।
सरहदें अपनी बता कर अब नदी खामोश हैं। 
कंक्रीट के जंगलों मैं अब मलबे का अम्बार रह गया।

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