………उसके बाद यंहा रहेगा कूड़ा और अप्सिस्ट
सुना है गैरसैण इन दिनों हाईटेक सिटी मैं कन्वर्ट हो रहा है, गैरसैण मैं लाखों की लागत से विधान सभा का तम्बू लगाया जा रहा है. साथ ही मंत्री और संतरियों के लिए भी टेंट लग रहे हैं. पुलिस के साथ पी ऐ सी भी यंहा आ रही है. लेकिन विधान सभा का ये नाटक ख़त्म होते ही ये सब ठाट बाट भी देहरादून चला जाएगा, और
उसके बाद यंहा जो रहेगा वो होगा कूड़ा और अप्सिस्ट राज्य सरकार ने आने की तो पूरी योजना बताई और ये भी दावा कर दिया की खर्च एक करोड़ से कम होगा, पर सत्र के बाद फैले कूड़े और अप्सिस्ट के निस्तारण की कोई योजना नहीं बनायीं है. जो अभी नहीं सोचा गया तो बाद में गैरसैण मैं महामारी फैलने की स्थिति पैदा होगी। मेरा ये लिखने के पीछे किसी प्रकार से डर फैलाने का मकसद नहीं है. लेकिन तजुर्बा बताता है की जिस शहर या गांव मैं बड़े आयोजन होते हैं वंहा आयोजन तक तो सब ठीक रहता है। लेकिन आयोजन के बाद जो होता है वो स्थानीय लोगों को भुगतना होता है.
इस बात का यदि जीवंत उदाहरण देखना हो तो तीर्थयात्रा ख़त्म होने के बाद यात्रा पड़ावों पर देखा जा सकता है. क्योंकि यात्रा शुरू होने के समय तो शासन और प्रशासन हर चीज़ को अपडेट करता है, लेकिन आज तक कूड़े के निस्तारण के लिए कोई योजना नहीं बनायी जाती। सो गैरसैण में इसकी पुनरावृति होने की मुझे सनक हुई तो आपके साथ साझा करने का मन हुआ।
गैरसैण को लेकर कई और बातें भी हैं लेकिन वो फिर कभी
मगर गैरसैण में बचने वाले इस करोड़ों के कूड़े पर आप अपनी राय जरूर साझा करें।
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