...................विचारों के नकल करने का भी खूब चलन हो निकला है।

...............सोशल मिडिया से जन्हा विचारों के प्रसारण को बेहतर और तेज माध्यम मिला है, वन्ही विचारों के अनुसरण के बजाय विचारों के नकल करने का भी खूब चलन हो निकला है। कई बार समाज में बौद्धिक प्रतिमान बन चुके साथी भी स्वयं को इस चलन से अलग नहीं रख पा रहे। कल ही मैं भी इस चलन से ग्रस्त हो गया और अपने एक प्रेरक व्यक्तित्व की समझ और विचार की नकल कर बैठा मगर सौभाग्य से मुझे सिखाने वाले लोगों की अच्छी तादाद है तो मैंने स्वयं को ठीकठाक कर लिया। और खुद को ठीकठाक रखने और करने के लिए मैं अपने सभी साथियों का सदैव आभारी रहूँगा और सदैव साथियों से इस प्रकार के समर्थन और सहयोग की अपेक्षा करूँगा।

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