''आपणा बल्दो सी मार्युं''

हमारी बोली में एक कहावत है-
''आपणा बल्दो सी मारयूँ''

जिसका भावार्थ है की अपने बैल के मारने पर आप गुस्सा भी नही कर पाते.
तो उडी की घटना के बाद कुछ लोगों की स्थिति ऐसी हो गयी है
क्योंकि जब सत्ता से दूर थे तो देश के एक बड़े राष्ट्रभक्त जमात ने बिना ''प्रधानमन्त्री'' पद की गरिमा की फ़िक्र किये
कालेज पालिटिक्स की तरह बड़ी बड़ी बातें कही
उसके बाद जब मैदान में आये तो
''1 के बदले कुछ 11 के अनुपात''
में काम करने काम करने का दावा किया
लेकिन ये क्या जब साबित करने की बात आई तो
" कूटनीति, संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व में राष्ट्र की विश्वसनीयता" का
'' बुलेट प्रूफ'' कवच पहन लिया है.
जबकि वर्तमान में राष्ट्रभक्ति की शब्द पुरोधा जमात के एक वरिष्ठ योद्धा ने 1 टीवी शो में एंकर के एक सवाल पर
कुछ
''शठे शाठ्यम समाचरेत''
''जैसे को तैसा''
सा कुछ कहा था. पर अब पूरी जमात इन जुमलों पर अमल करने से कतरा रही है.
तो ये जुमलों की राजनीति और कूटनीति कैसे राष्ट्र और राष्ट्रवाद को बचाएगी ये सवाल उठाना लाजमीहै.
तो बोलो जय भारत! जय भारती!!

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