.......नौकरशाही के मनोबल या सत्ता परिवर्तन की चिंता
.........न भय न भरस्टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार!!!!!!
ये नारा कुछ सुना सुना से लगता है ना! जी जरूर सुना होगा ये भाजपा का लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सरकार के खिलाफ उपयोग किया गया नारा है। जिसके भरोसे देश की जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया। और देश में जीरो टॉलरेंस की आस की, लेकिन अब ये क्या केंद्र के मंत्री जी अब घूसखोरों पर कार्रवाई होने पर अधिकारियों के मनोबल टूटने को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
जो राष्ट्रवाद की किस परिभाषा को परिभाषित कर रहा है, ये विचारणीय है। देश निर्माण के कार्य मे जुटे बांये, दांये और मध्य वाले सभी विचारकों को इस पर गम्भीरता सोच समझकर ज़ीरो टॉलरेंस का इंतजार कर रही जनता को समझना चाहिए, कि जनता की गाढ़ी कमाई से राष्ट्र निर्माण आवश्यक है, या सत्ता में काबिज नेताओं की सुरक्षा के लिए अधिकारियों के मनोबल के कंधे पर रखकर सहृदयता का प्रदर्शन।
कंही ऐसा तो नहीं कि भाजपा इस रास्ते उत्तराखण्ड में सत्ता के परिवर्तन को रोकना चाहती है। क्योंकि जिस प्रकरण को लेकर अधिकारियों के मनोबल पर मंत्री जी चिंता व्यक्त कर रहे हैं, वो प्रकरण सरकार के बीच के लोगों पर जा कर ही थमता दिख रहा है।
और ये सवाल इस लिये भी पेचीदा हो जाता है कि अधिकारियों को बेलदार समझने वाले देश के कर्णधारों को अचानक अधिकारियों के मनोबल की चिंता हो रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में एक आईपीएस अधिकारी के घर पर हुए उत्पात के दौरान ये विचार किसी भी कर्णधार के मन में नहीं कौंधा, आपको ये कुछ नया सा नहीं लगता ज़ीरो टॉलरेंस का फार्मूला?
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