न्यायालय, आबकारी विभाग और प्रशासन का आबकारी प्रेम

..…...चमोली जिले में प्रशासन के आबकारी विभाग के प्रति प्रेम चरम पर है। यंहा प्रशासन ने इस प्रेम के चलते सरवोच्च न्यायालय के आदेशों को भी ठेंगा दिखाने में गुरेज नहीं कि है। जिससे अब प्रशासन का आबकारी प्रेम जग जाहिर हो गया है।

मामले के अनुसार ज़िला प्रशासन ने न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध मई माह के लिये ज़िले की मेहलचौरी, ग्वालदम, कर्णप्रयाग, गौचर, गैरसैंण, औऱ देवाल के शराब की दुकानों के मई माह के लिये आवंटन प्रक्रिया के लिये विज्ञप्ति जारी की गई है। जबकि न्यायालय द्वारा दिये आदेश के अनुसार सिर्फ अप्रैल माह के लिए समयावधि बढाई गयी थी। साथ ही विज्ञप्ति में साफ तौर पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटन की बात कही गयी है।

जिससे प्रशासन का आबकारी प्रेम साफ प्रदर्शित हो रहा है, और इससे आगे भी प्रशासन के प्रेम का आलम यह है कि ज़िले के घाट में शराब के विरोध में चल रहे आंदोलन के 12 दिनों बाद भी प्रशासन ने महिलाओं की सुध नहीं ली है। गौचर में पुलिस की ओर से महिलाओं को मामले दर्ज करने की चेतावनी दी जा रही है।

ऐसे में नरेंद्र सिंह नेगी जी की पंक्तिया प्रासंगिक हो रही हैं-
दारू बिना यख ज़ुकती नहीं, दारू बिना यख मुक्ति नि।
यिं देवभूमि मां दारू की गंगा बगदी जांणी रुकदी नी।।

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