फिर चिल्लाने लगे पहाड़।।
फिर अलसाने लगे पहाड़,
फिर सुलगने लगे पहाड़।।
अपनी थाती की खातिर,
फिर चिल्लाने लगे पहाड़।।
मरती माँ बहनों को ढो-ढो कर,
अब तो थकने लगे पहाड़।।
अपने सुने गांवों की खातिर,
फिर चिल्लाने लगे पहाड़।।
बहती हुई जवानी देख-देख,
अश्क़ बहाने लगे पहाड़।।
अपनों की बेरुखी देखकर,
अब चिल्लाने लगे पहाड़।।
तेरे मेरे कल की खातिर,
सत्ता से भिड़ने लगे पहाड़।।
गैरसैंण की खातिर देखो,
फिर चिल्लाने लगे पहाड़।।
----लापरवाह
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