ण के लिये पूरे विश्न में अपनी पहचान बनानें वाले एतिहासिक चिपकाे आन्दाेलन की 45वीं वर्षगांठ पर इस आन्दाेलन की प्रणेता स्व० गाैरा देवी की कर्मभूमि और इस विश्वव्यापी आन्दाेलन की स्थली रैंणी मैं आज गाैरादेवी सहित उनकी तमाम 21सहयाेगी सहेलियाें काे याद किया गया,यहां स्व०गाैरा देवी के पुत्र चन्दर सिंह राणा नें ग्रामीणाें के साथ मिलकर सादगी से गाैरा देवी स्मारक पर पुष्पसुमन अर्पित कर इस चिपकाें आन्दाेलन में स्व० गाैरा देवी के साथ साथ सहयाेगी रही बुजुर्ग भट्टी देवी,गाेमा देवी और फागुनी देवी के निधन पर  शाेक सभा कर उन्हें भी श्रद्धासुमन चढाये,विड़म्बना है कि पूरे विश्व काे पर्यावरण सरंक्षण की ए बी सी डी सिखानें वाले उत्तराखंड के इस प्रसिद्ध पर्यावरण रक्षा आन्दाेलन “चिपकाे आन्दाेलन ” काे आज प्रदेश के शासन प्रशासन सहित अपनाें नें ही भुला दिया है।

हालांकि चिपकाे नेत्री स्व० गाैरा देवी के कर्मस्थली नीति घाटी के रैणीं गांव के गाैरा देवी स्मारक स्थल में हर वर्ष की तरह चिपकाे आन्दाेलन की वर्षगांठ पर हाेनें वाला चिपकाे महाेत्सव इसबार चिपकाे आन्दाेलन में सहयाेगी रही गाैरा देवी की तीन बुजुर्ग सहयाेगी सहेलियाें की मृत्यु हाेनें के चलते सादगी के साथ  श्रद्धांजली और शाेक सभा करके सादगी पूर्वक मनाया गया।

वहीं जाेशीमठ नगर में स्व० गाैरादेवी काे याद करनें की बात ताे दूर एक फाेटाे तक जनप्रतिनिधियाें काे उपलब्ध न हाे सकी, शासन प्रशासन की बेरुखी पर जनप्रतिनिधियाें एंव धाैली गंगा घाटी के लाेगाें नें सरकार काे खूब खरी खाेटी सुनाई,बावजूद इसके चिपकाे आन्दाेलन की 45वीं वर्षगांठ पर आज पूरा पैनखंडा चिपकाे चिंगारी काे याद कर उन्हे अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजली दे रहा है।

दरअसल चिपकाे आन्दाेलन एक पर्यावरण रक्षा का आन्दाेलन है,यह भारत के उत्तराखंड राज्य में गांव की महिलाओं नें वृक्षाें की कटान का विराेध करनें के लिये किया था,यह जनआन्दाेलन तत्कालीन उत्तरप्रदेश के चमाेली जिलें में स्थित धाैली गंगा घाटी के गांव रैंणी में 1973 हुआ था,और एक दशक के अन्दर पूरे प्रदेश में फैल गया था,चिपकाे आन्दाेलन की एक खास बात ये थी कि ये पूरी तरह महिलाओं का आन्दाेलन था,
क्या था खास आन्दाेलन में।
1974 में वनविभाग नें जाेशींमठ के रेंणी गांव के पंगराणी के हरे भरे 680 हैक्ट्यर के जंगल काे ऋषिकेश के एक ठेकेदार काे नीलाम कर दिया था,जिसमें 1974में सरकार नें रैंणी गांव में इन 2459पेडाें काे कटान हेतु चिन्हित कर दिया था,तब 23मार्च 1974काे रैंणी गांव में पेडाें का कचान किये जाने काे लेकर गाेपेश्वर में विराेध रैली हुई,जिसमें गाैरा देवी ने महिलाओ का नेतृत्व सम्भाला था,ऐसे में प्रशासन नें साेची समधी साजिश के तहत 26मार्च की तारीख तयकर सडक निर्माण में मुवावजा देने के लिये सभी पुरुषाें काे गाेपेश्वर वार्ता हेतु बुलाया और ईधर ठेकेदार काे रैंणी के जंगल काटनें की अनुमति दे दी,रैंणी गांव में पेड काटनें वाले मजदूराें की भनक गांव की एक लडकी काे मिली ताे उसमें गाैरा देवी काे सूचना दी ऐसे में गाैरा देवी पर आज के दिम एक बडा सामूदासिक दायित्वआन पडा,आज के दिन ही गाैरा देवी 21महिला सहयाेगियाें और कुछ बच्चाें संग निहत्थी पंगराणी के जंगलाें काे बचानें निकली थी।

गाैरा देवी नें महिलाओं काे गाेलबंद कर पेडाे पर चिपटनें काे कहा और गाैरा देवी के साथ उनकी सहयाेगी भूसी देवी,हरकी देवी,बती देवी,उमा देवी,रुक्का देवी,रुपसा देवी,तिलाडी देवी,इन्द्रा देवी सहित पूरी 21महिलायें पेडाे काे कटनें से बचाने हेतु पेडाे से चिपट गई बाद में मजबूरन मजदूराे काे वापस लाैटना पडा था।
वन संरक्षण के इस अनूठे आंदाेलन नें न सिर्फ देश भर में पर्यावरण के प्रति एक नई जन चेतना जागरुकता जगाई अपितु अन्तराष्ट्रीय स्तर पर “ईकाे फेमिनिज्म”या नारीवादी पर्यावरणवाद का एक नया मुहावरा भी विकसित किया,उत्ताराखंड का चिपकाे जन आन्दाेलन वास्तव में एक घटना मात्र नही है,यह पर्यावरण व प्रकृति की रक्षा के लिये सतत चलने वाली एक प्रक्रिया है,आज इस चिपकाे आन्दाेलन की 45वीं वर्षगांठ पर देश चिपकाे नेत्री गाैरा देवी सहित सभी सहयाेगियाें काे नमन कर रहा है।

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