सीख लिया
दुनिया की फ़िक्र को छोड़छाड़, जीना मैने भी सिख लिया।
सितमगरों की महफ़िल में, मैने मुस्काना सिख लिया।।
बोझिल रहकर खामोशी से सितमों को सहना छोड़ दिया।
सच्ची बातें सरेआम कहने का हुनर अब मैने सिख लिया।।
गमों के दौर में भी मैंने कहकहे लगाना सीख लिया।
तोहमत को अब दुनियां की सर माथे लेना सीख लिया।
और जीवन के इस टेढ़े मेढे रस्तों पर गिर कर सम्भलना सिख लिया।
अपनों और गैरों में अंतर करना भी मैंने सीख लिया
--- लापरवाह
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