वो मुझको अच्छी लगती है.....

भीड़ में जो गुमशुम रहती है।
वो मुझको अच्छी लगती है।।
चेहरे पर बिखराये जुल्फें।
वो  जो प्यारी  लगती  है।।

नजर बचाकर दुनिया से।
दीदार मेरा वो करती है।।
कुछ कहना है शायद उसको।
कुछ बात है, जो सकुचाती है।।

क्या रातों को खाबों में।
वो भी मुझको तकती होगी।।
क्या रातों को तन्हाई में।
वो भी तारे गिनती होगी।।

ये इश्क है या  कुछ  और बता।
जो हर ओर नज़र वो आती है।।
हर पल आंखों में उसका चेहरा।
धड़कन उसके गीत सुनाती है।।

क्या बात है उसमें ऐसी। जो,
दिल मेरा उसका हो बैठा है।।
उसको पाने  की  ख्वाइश में।
सुदबुध है अपनी खो बैठा है।।

वो भी तो मेरे दीदार की खातिर।
हर शाम गली में आती है।।
कहती तो लबों से कुछ भी नहीं।
पर  आंखों  से प्यार जताती है।।

जो एक बार वो पहलू में आये।
तो उसको दिल का बताऊंगा।।
क्या बीती है उसके बिन मुझ पर।
हर पल की बात उसे समझाऊंगा।।

साथ मांग कर जीवन भर का।
मैं उसका हो जाऊंगा।।
वो जो हाँ कह दे तो।आपना
सब उस पर न्यौछार कर जाऊंगा।।

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