कहने वाले...

नज़र आते नहीं खुद को मजदूरों का खैरख्वाह कहने वाले।
मजदूरों को भाई और उनकी बीबियों को बहन कहने वाले।।
दौर-ए-गुरबत में खो गए हैं कंही खुद को इंसान कहने वाले।
ताबेदार सियासत हो गये खुद को हमारा रहनुमा कहने वाले।।

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